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घनश्यामपुर में आंगनवाड़ी सेविकाओं का प्रशिक्षण संपन्न, शीतलहर से बचाव और बाल विवाह उन्मूलन पर दिया गया विशेष जोर

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दरभंगा (घनश्यामपुर), 12 जनवरी 2026।
बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से ई-किसान भवन, घनश्यामपुर (दरभंगा) में आंगनवाड़ी सेविकाओं का एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण शीतलहर के प्रभाव, उसके लक्षणों, बचाव के उपाय एवं प्राथमिक उपचार विषय पर केंद्रित रहा, जिसे बिहार इंटर एजेंसी ग्रुप, यूनिसेफ एवं जीपीएसवीएस के तकनीकी सहयोग से संपन्न कराया गया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आंगनवाड़ी सेविकाओं को शीतलहर के दौरान गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान करना रहा, ताकि वे अपने-अपने पोषक क्षेत्रों में समय रहते जागरूकता फैलाकर किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपट सकें।
68 सेविकाओं और 3 पर्यवेक्षिकाओं की सहभागिता
इस प्रशिक्षण सत्र में कुल 68 आंगनवाड़ी सेविकाओं तथा 3 महिला पर्यवेक्षिकाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा शीतलहर से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, उनके प्रारंभिक लक्षणों की पहचान, ठंड से बचाव के उपाय तथा प्राथमिक उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही सेविकाओं को यह भी बताया गया कि शीतलहर के दौरान किन सावधानियों को अपनाकर बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित रखा जा सकता है।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर चर्चा
प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर विशेष चर्चा की गई। इस दौरान बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों एवं समाज में इसकी रोकथाम के लिए आंगनवाड़ी सेविकाओं की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
सत्र के अंत में उपस्थित सभी आंगनवाड़ी सेविकाओं और महिला पर्यवेक्षिकाओं ने अपने-अपने पोषक क्षेत्रों को बाल विवाह मुक्त बनाने की सामूहिक शपथ ली और इस दिशा में सतत प्रयास करने का संकल्प व्यक्त किया।
जागरूकता फैलाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि आंगनवाड़ी सेविकाएं ग्रामीण समाज की रीढ़ हैं और वे घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। शीतलहर से बचाव और बाल विवाह उन्मूलन जैसे विषयों पर उनका प्रशिक्षण समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगा।
आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से आंगनवाड़ी सेविकाओं की क्षमता में वृद्धि होगी और वे समुदाय स्तर पर बच्चों एवं महिलाओं के कल्याण के लिए और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगी।

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